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जे.जी.एम. अस्पताल की लापरवाही से मासूम अंशिका की मौत: परिजनों ने की सख्त कार्रवाई की मांग बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा और अस्पतालों में लापरवाही की हकीकत

🙏 जिला संवाददाता सुखदेव आजाद 🙏

प्रदेश में भाजपा सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का जोर-शोर से प्रचार कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। चांपा के जे.जी.एम. अस्पताल में हुई मासूम अंशिका की मौत इस बात का बड़ा उदाहरण है कि सरकारी नीतियाँ और प्रचार प्रसार सिर्फ नारों तक सीमित हैं।
कैसे गई मासूम अंशिका की जान?
शनिवार, 15 मार्च 2025 को शाम करीब 7:30 बजे चांपा के जे.जी.एम. अस्पताल में एक दर्दनाक घटना घटी। शक्ति निवासी मनीष कुमार सार्वडिया और उनकी पत्नी मनीषा सार्वडिया अपनी 1 साल 5 माह की मासूम बेटी अंशिका को बेहतर इलाज के लिए चांपा लाए थे। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं था।
बिना विशेषज्ञ की निगरानी में बच्ची को ब्लड चढ़ाया गया, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई। जैसे ही डॉक्टरों को पता चला कि बच्ची की तबीयत गंभीर हो गई है, तब आनन-फानन में मुख्य चिकित्सक डॉ. सुमित गुलाबानी को बुलाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, और मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने लगाया अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
अंशिका की असमय मौत से माता-पिता सदमे में हैं। उनका कहना है कि अगर सही समय पर उचित इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में उपचार मिलता, तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता
अस्पताल की लापरवाही यहीं खत्म नहीं होती। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने स्थानीय पुलिस को भी सूचित नहीं किया। इसके बजाय, बाहरी दलालों की मिलीभगत से परिजनों को बहला-फुसलाकर शक्ति भेज दिया गया। यह घटना अस्पताल की अव्यवस्था और असंवेदनशीलता को उजागर करती है।
अस्पताल प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस घटना के बाद चांपा जे.जी.एम. अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं
बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के बच्ची को ब्लड क्यों चढ़ाया गया
अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता क्यों नहीं थी?
मरीज की गंभीर हालत होने पर पुलिस और प्रशासन को सूचित क्यों नहीं किया गया?
बाहरी दलालों की अस्पताल में क्या भूमिका थी
क्या प्रशासन कोई कार्रवाई करेगा?
यह मामला सिर्फ एक मासूम बच्ची की मौत का नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की असंवेदनशीलता का प्रमाण है। परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस घटना पर क्या रुख अपनाता है। क्या दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

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